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(2) छोड़ने की कला!

पंकज खन्ना 9424810575 अगले/पिछले ब्लॉग पोस्ट: (1)  प्रस्तावना :  कुछ भी!  10/10/25 (2)  छोड़ने की कला ।17/10/25 (3)  Art of Leaving : वानप्रस्थ.12/11 (4)  बम पुलिस या बम्पुलिस ! 19/11 पिछले अंक से जारी... छोड़ने की कलाएं कई टाइप की हो सकती हैं। क्रमानुसार नीचे पढ़ें: (1) डामिस पिंचिस ने पिछला आर्टिकल पढ़ लिया है।और वो लगातार फोन कर रहा है। के रिया है कि वो तो बचपन से जानता है छोड़ने की कला! बोलता है कि अब उसके आर्केस्टा में इस कला का प्रदर्शन भी करेगा! पता नहीं उसके मन में छोड़ने की कला से क्या मतलब निकल रहा है। लेकिन असल में पिंचिस को पेचिस ( पेचिश, Dysentry) होती रहती है और वो छोड़ता रहता है! उसका तो ऐसा ही है कि  जब मन में आया महफिल में छोड़ दी और लोगों को बेहोश कर दिया। ये वाली छोड़ने की कला तो पिंचिस को ही मुबारक हो भिया! इनने तो Art of Living की जगह Fart of Living की कोचिंग शुरू की हुई है! छोड़ दो उसे और छोड़ने दो उसे! (2) छोड़ने की कला का दूसरा  मतलब घर, चौपाल, पार्लियामेंट, स्कूल,  कॉलेज, ऑफिस में बैठकर डींगे हांकना या लंबी लंबी फें...

(1) प्रस्तावना।

पंकज खन्ना 9424810575    अगले/पिछले ब्लॉग पोस्ट: (1) प्रस्तावना :  कुछ भी! 10/10/25 (2) छोड़ने की कला ।17/10/25 (3) Art of Leaving : वानप्रस्थ.12/11 (4) बम पुलिस या बम्पुलिस ! 19/11 अभी तक के हमारे सभी ब्लॉग (  तवा संगीत ,  रेल संगीत ,  साइकल संगीत ,  तवा भाजी ,  रेस कोर्स रोड इंदौर के पक्षी ,  Love Thy Numbers , Epeolatry , और  CAT-a-LOG ) थोड़े विषयात्मक हैं। उनमें थोड़ी बहुत इधर-उधर की बातें तो की जा सकती हैं और की भी जाती हैं। लेकिन विषय पर बने रहना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि ऊपर लिखी इन ब्लॉग सीरीज में ' कुछ भी' या ' कुछ तो भी ' लिख दिया जाए। इंदौरी लोग इन वाक्यांश 'कुछ भी' या 'कुछ तो भी' का प्रयोग बहुतायत से कुछ ऐसे करते हैं: कोई लड़की अगर होनोलूलू टाइप की ड्रेस पहनकर, आत्मविश्वास और स्वेच्छा से  इठलाती हुई नमूदार हो जाए तो भले इंदौरी लोग ऐसी ड्रेस को देखकर शर्माते हुए एक दूसरे से बोलेंगे: कुछ तो भी पेन रक्खा है इनने, भिया यार! और बुरे इंदौरी कुछ तो भी गंदा बोलकर अपना असली चेहरा दिखा देते हैं। होटल या किसी फ्री पार्टी में खा...